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कड़े जाओगे गाम छोड़ कै Kade jaaoge gaam chhodkar

कड़े जाओगे गाम छोड़ कै सुख और आराम छोड़ कै ऊरै ही तो जन्मे थे, कट्ठे होकै बैठे, पीया और खाया कर दे  सारे बालक बैठक म मिल बैठ कै हांस्या और हंसाया कर दे फेर के यू सब देखण नै मिल जैगा, कड़ै जाओगे सारा झाम ताम छोड़ कै  कड़ै जाओगे गाम छोड़ कै, सुख और आराम छोड़ कै जोहड़ म नहाणा लिसोड़ै जामण खाणा पाटृया होया शाही बाणा दनौदे आले जोगी का थ्याई म वो रांझां गाणा सारंगी बजाणा ओड़ै फोन म आंख फुड़ाओगे, उरै आली सुहानी शाम छोड़ कै  कड़ै जाओगे गाम छोड़ कै, सुख और आराम छोड़ कै बड़े बुजुर्ग का विदेश में जाकर मन नहीं लगेगा और यहीं पर छोड़ कर जाओगे तो फिर यह बनेगा क्यूकर जी लागै गा बड़ों का तारे बिन  ना इनका जी लागै ओड़ै, पडौस घर आले बिन क्यूकर जांवै यैं बी उरै आला खेड़ा राम छोड़ कै  कड़ै जाओगे गाम छोड़ कै, सुख और आराम छोड़ कै के करोगे उस कमाई का, दो टैम की रोटी ए तो खाणी स पेट तो उन कुत्ते बिल्ली का भी भरजे स‌ जिनकै ना किल्ले ना नौकरी पाणी स इतना तो उरै भी करकै खा सकौ, के लोड़ स जाओ घर बार तमाम छोड़ कै  Uk, USA jaan ki k lod gaam bna do amrika Miljul kaam kro ure ka b bajega ...

खुद की लगा कै बोली साहूकार बिक गए Sahukar bik ge bolidar bik ge

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आज का सच खुद की लगा कै बोली साहूकार बिक गए कोई इसे अपने उपर न ले, न ही वोट से जोड़े, बस कवि मन से निकली कुछ कड़वी पंक्तियां हैं  अजब हो गया गजब हो गया  ऐसा यू कलयुग हो गया  बोली जो लगाया कर दे, आज वो बोलिदार बिक गे  खरीद ते थे जो खेप की खेप पैसे वाले थे  आज वो कहलाने वाले साहूकार बिक गे  ठेके लिया करदे बडे बड़े, दूसरों के भी  आज वो ठेके तसली आले खुद ठेकेदार बिक गे   मर गया वो मटके के पानी बिन, प्यास से  घड़े बनाने पकाने वाले कुम्भकार बिक गे  रामू कवि किसान तू जुड़ा रह गया जमीं से  जब यहां बडे बडे मशूर कलाकार बिक गे दिहाड़ी कर पेट पालते, महीने भर के राशन के लिए   पसीना बहाते मजबूरी में, मजदुर के दीन ईमान बिक गे  खेती करते हैं अनाज उगाते पेट भरते जनता का आज वो महंगाई मे मेहनतकश किसान बिक गे  बनते हैं आसियाना रिहास जो जनता की  खुद की लगाके बोली वो मकान बिक गे   कहते हैं बिकती है हर चीज यहां रामू   बस कीमत सही हो, यहां खुद इंसान बिक गे  रातो में होते थे लुट के सौदे या चोरी के काम  आज तो दिन ढ...

गजल हरियाणवी में Gazal haryanvi m

Gazal Haryanvi mein रामू कवि किसान द्वारा लिखित इस पुस्तक में लगभग सभी कविताएं गजले हरियाणवी में हैं, हरियाणवी संस्कृति से जुड़ी हुई रचनाएं और गांव देहात की विरासत को संजोए हुए साथ में उनका अंग्रेजी और हिंदी अनुवाद भी होता है और भी कई कविताएं और किताबें लिखी गई है जो कि अभी इस ग्रुप में लानी बाकी है  कौन-कौन सी किताबें हैं और जीवनी के बारे में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते हैं https://kavitarupisarita.blogspot.com/2022/08/ramu-kavi-kisan-nachar-khera-biography.html

रामू कवि किसान जीवनी Biography Ramu Kavi Kisan

रामनिवास नचार खेड़ा जीवनी Ramu Kavi Kissan Biography Ramniwas Biography Ramniwas Nachar Khera Jind Haryana Biography Ramu Kavi Kisan Biography  रामू कवि किसान नचार खेड़ा जीवनी https://ramukavikissan.blogspot.com/2018/01/ramu-kavi-kissan-biography-ramniwas.html?m=1 2021 घर पर फोटो जीवन वृत्त - रामनिवास, नचार खेड़ा, जींद हरियाणा हिंदुस्तान ने अपनी तीसरी क्लास तक की पढ़ाई अपने घर और गांव नचार खेड़ा की चौपाल में ही पूरी की.  चौथी क्लास पड़ोस के गांव काकड़ोद से की. इसके बाद परिवार उचाना शहर चला गया तो वहां के एक प्राइवेट स्कूल न्यू टैगोर हाई स्कूल से पांचवीं से आठवीं तक की पढाई की.  इसके बाद फिर गांव आकर नोवीं से बाहरवी कक्षा तक सूरज भान मेमोरियल स्कूल काकड़ोद से पूरी की. बारहवीं में भिवानी बोर्ड के 0.01 फीसदी छात्रों में अपना स्थान बनाया और ग्रामीण मेरिट प्राप्त की. नोवीं क्लास में थे तभी से लिखना और खेत में बैलों से जुताई करना शुरू कर दिया था. अपना अधिकतर समय खेतों और किताबों में ही बिताना पसंद करते थे. कुछ समय गांव के स्कूल में वॉलीबॉल खेलने के लिए भी निकाल लिया करते थे. बैलों से ...

या तो जीत मिलेगी या सीख मिलेगी Ya to Jeet Milegi ya Sikh milegi

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27 अक्टूबर 2022 को लिखी गई कविता जिसमें जिंदगी का असली एहसास लिखा है मेहनत करते रहो लगे रहो लगातार या तो जीत मिलेगी या सीख मिलेगी हर इंसान राजनीति से जुड़ा है, हम इससे अछूते नहीं रह सकते परंतु राजनीति में इतना ज्यादा भी नहीं घुसना चाहिए कि हम अपने उसूल ही छोड़ दें  हमने भी गांव में अच्छी राजनीति की शुरुआत की थी जबकि बहुत से ओछी राजनीति कर गए, कुछ लोग पूरा विश्वास और समर्थन और कसमे देकर विश्वासघात कर गए परंतु फिर भी हमें कोई गम और दुख नहीं है क्योंकि  फिर अपनी जिंदगी उसी तरह से पटरी पर आ जाएगी और  पहले से बेहतर अच्छी जिंदगी की शुरुआत करेंगे जो सब लोगों के लिए खुशहाली लेकर आए ईमानदारी लग्न से मेहनत करते रहो लगे रहो लगातार या तो जीत मिलेगी या सीख मिलेगी घूमे हैं गांव की हर गली में, हर घर तक मिला सम्मान और हौसला हर दर तक पता था हर घर में यह चीज मिलेगी  या तो जीत मिलेगी या सीख मिलेगी जो सोचा था नहीं मिला किसी को भी नहीं मिलता  नहीं पता होता, कौन सी चीज अपने नसीब मिलेगी या तो जीत मिलेगी या सीख मिलेगी पूरी उम्र गुजर जाती है किसी को नौकरी पाने में हमने छोड़ दी थी वह आरा...